महाकुंभ सिर्फ उत्सव नहीं, बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। संगम किनारे एक अस्थाई शहर बसाना और उसको नियमित तौर पर साफ रखना आसान नहीं। ऐसे में, यह सबसे जरूरी हो जाता है कि जो लोग इस मेले में आते हैं, उनको साफ-सुथरा वातावरण और रहने की जगह दी जाए।

चुनौती भी है कि लगातार लाखों-करोड़ों लोगों के आने-जाने और रहने के बीच स्वच्छता बनाए रखना। महाकुंभ में इस चुनौती से कैसे निपटा जा रहा है? इस रिपोर्ट में पढ़िए- स्वच्छता के लिए क्या उपाय किए गए हैं? साफ-सफाई के क्या मापदंड अपनाए जा रहे?

संगम नोज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। यह सबसे ज्यादा भीड़-भाड़ वाला इलाका है। जब लोग वहां स्नान के लिए जाते हैं, तो अपने कपड़े और बाकी सामान वहीं घाट पर ‘दान’ के रूप में छोड़ कर चले जाते हैं।
ऐसे में नगर विकास विभाग के 6 ईओ सुपरवाइजर की तरह काम करते हैं। वह सफाईकर्मियों के काम को मॉनिटर करते हैं। घाट पर सफाई के लिए क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) बनाई गई हैं। ट्राई स्किमर भी चलाए जा रहे हैं। नाव और चलनी के माध्यम से भी साफ-सफाई को बढ़ावा दिया जा रहा है
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में 1.50 लाख टॉयलेट, 4 लाख से ज्यादा डस्टबिन हैं। जिनकी साफ-सफाई के लिए सफाईकर्मियों की 800 टीमें बनाई गई हैं। यह सबसे बड़ा सफाई अभियान है।
एक टीम में 12 लोग हैं। एक मेट होता है, जो ग्रुप के लीडर की तरह काम करता है। उसके साथ एक महिला मेट होती है। बाकी 10 सफाईकर्मी होते हैं। एक तिहाई कर्मचारियों की ड्यूटी रात में लगाई गई है। यह शिफ्ट रात 8 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक की रहती है।
संगम, ऐरावत, नाग वासुकी और अरैल जैसे क्षेत्रों में एक चुनौती यह भी है कि इतने ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने के समय सफाई और मुश्किल हो जाती है। ऐसे में, प्रशासन ने इन क्षेत्रों में रात में सफाईकर्मियों की ड्यूटी बढ़ा दी है, क्योंकि उस समय भीड़ थोड़ी कम होती है। इससे सड़कों की सफाई करना आसान हो जाता है।
साफ-सफाई के लिए नगर निगम से 100-150 सफाईकर्मी जोड़े गए हैं। साथ ही नगर विकास विभाग से 6 एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) की ड्यूटी संगम नोज पर लगाई गई है। स्ट्रीट स्वीपिंग और लाइनर बैग्स चेंज करने का काम ज्यादातर रात में ही किया जाता है। पूरे मेले को 25 सेक्टर में बांटा गया है। हर सेक्टर में कुछ सर्कल होते हैं, जिनको सर्कल इंचार्ज संभालते हैं।
